सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट मोड पर, हर कॉल और ईमेल की जांच
नई दिल्ली। राजधानी में बम धमकियों से जुड़ी ई-मेल की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। साल 2025 के दौरान 500 से अधिक स्कूलों और शैक्षणिक संस्थानों को धमकी भरी ई-मेल मिलीं। सूचना मिलते ही स्कूलों को खाली कराया गया। पुलिस, बम निरोधक दस्ते और डॉग स्क्वॉड ने मौके पर पहुंचकर गहन तलाशी अभियान चलाया। हालांकि, अधिकतर मामलों में कोई संदिग्ध वस्तु बरामद नहीं हुई और धमकियां फर्जी निकलीं। इसके बावजूद हर बार स्कूलों में अफरातफरी और भय का माहौल बन गया।
स्कूल कर रहे काउंसलिंग सत्र का आयोजन
डॉक्टर राम मनोहर लोहिया में मनोचिकित्सक लोकेश सिंह शेखावत ने बताया कि इन घटनाओं ने बच्चों के मनोवैज्ञानिक स्वास्थ्य प्रभाव डाला है। इसने भय और असुरक्षा की भावना पैदा की। उन्होंने बताया कि धमकियों के कारण अभिभावकों को भी तनाव होता है। वहीं, जो बच्चे सच्ची लगन के साथ पढ़ना चाहते हैं धमकियां उनका मनोबल तोड़ रही है। वहीं, अभिभावकों का कहना है कि जब उन्हें बम धमकी की सूचना मिलती है, तो वे घबरा जाते हैं और तुरंत स्कूल की ओर दौड़ पड़ते हैं। कई बच्चों को रोते और घबराते भी देखा गया। इसी को देखते हुए कई स्कूलों ने बाद में काउंसलिंग सत्र आयोजित किए।
एक ही दिन में 300 से अधिक मेल
जुलाई, 2025 में 40 से 50 स्कूलों को बम धमकी वाले ई-मेल मिली। ये सभी संदेश झूठे निकले। वहीं, पिछले साल सितंबर में एक ही दिन में 300 से अधिक स्कूलों और कई हवाई अड्डों को धमकी भरी ई-मेल मिली। इन संदेशों को एक समूह ''टैरो राइज 111'' द्वारा भेजा गया था। इसी महीने शालीमार बाग, द्वारका और साकेत स्थित मैक्स अस्पतालों को भी बम से उड़ाने की धमकी दी गई। लेकिन, वहां भी कुछ नहीं मिला। साल 2026 में भी यह सिलसिला जारी रहा। फरवरी और मार्च में करीब 15 से ज्यादा स्कूलों के साथ-साथ ऐतिहासिक धरोहर लाल किला और दिल्ली विधानसभा को भी बम से उड़ाने की धमकी दी गई।
वीपीएन से भेजी गईं ई-मेल
पुलिस जांच में पाया गया कि अधिकतर ई-मेल वीपीएन और एन्क्रिप्टेड सर्वरों के माध्यम से भेजे गए, जिससे प्रेषक की वास्तविक पहचान छुपी रही। साइबर सेल और तकनीकी विशेषज्ञों को जांच में शामिल किया गया। कुछ मामलों में यह भी सामने आया कि धमकी भेजने वाले नाबालिग थे। जुलाई 2025 में एक 12 वर्षीय छात्र द्वारा मजाक में भेजी गई धमकी का मामला उजागर हुआ। उसने स्वीकार किया कि उसका उद्देश्य स्कूल बंद करवाना था। बम धमकियों से जुड़े हर मामले को पुलिस अत्यंत गंभीरता से लेती है।वर्तमान में प्राप्त बम धमकियों और संदिग्ध ईमेल की भी लगातार जांच जारी है। बच्चों और कर्मचारियों की सुरक्षा पुलिस की सर्वोच्च प्राथमिकता है। किसी भी शैक्षणिक संस्थान या सार्वजनिक स्थान की सुरक्षा में कोई लापरवाही नहीं बरती जाएगी। पुलिस प्रशासन पूरी सतर्कता, तकनीकी जांच और सुरक्षा प्रबंधों के साथ स्थिति पर नजर बनाए हुए है, ताकि आमजन में विश्वास और सुरक्षा की भावना कायम रहे। अपने बच्चे की सुरक्षा को लेकर बहुत चिंतित हूं। स्कूलों में जब बम की धमकी आई, तो मैं डर गई। इस दौरान स्कूल प्रशासन ने सभी बच्चों को मैदान में खड़ा किया और हमें स्कूल बुलाया। बच्चे बार-बार पूछ रहे थे कि क्या सच में स्कूल में बम है। मैं उन्हें समझाऊं नहीं पा रही थी कि यह झूठी धमकी थी। बच्चे काफी समय तक परेशान रहे। हमारे काम में भी बाधा आई। मेरे लिए यह अनुभव बहुत डरावना था। मैंने तुरंत अपने बच्चे को लेने के लिए स्कूल की ओर दौड़ा। बच्चों का डर और घबराहट देखकर मेरा दिल दहल गया। स्कूल प्रशासन ने सभी बच्चों और स्टाफ को सुरक्षित निकालने का प्रयास किया, लेकिन बच्चों में भय का माहौल लगातार बना रहा। मेरे बच्चे ने बताया कि वह मोबाइल पर भी धमकी वाली खबरें पढ़ रहा था और डर गया था। यह देखने के बाद एहसास हुआ कि सिर्फ स्कूल खाली करना पर्याप्त नहीं होता, बच्चों को मानसिक रूप से सुरक्षित महसूस करवाना भी जरूरी है। बम की धमकी की जानकारी मिलने पर मैं और मेरे दोस्त बहुत डर गए। कुछ छात्रों ने मोबाइल पर खबरें देखी और वे और भी डर गए। स्कूल में कई घंटे हम सब डर के माहौल में रहे। कुछ दोस्त तो रोने भी लगे। मैं खुद भी बहुत घबराया हुआ था। घर जाने तक मेरा डर बना रहा। मैंने यह महसूस किया कि झूठी धमकी भी डरा देती है।

