इन्फ्रास्ट्रक्चर बूस्ट: पूर्वी दिल्ली में एक्सप्रेसवे नेटवर्क का असर
नई दिल्ली। अगर आप राजधानी के पूर्वी दिल्ली इलाके में रहते हैं तो वक्त आपके मुस्कराने का है। कभी ट्रैफिक जाम से कराहता यह इलाका कई नए हाईस्पीड कॉरिडोर से जुड़ते ही नई उड़ान भरने लगा रहा है। दिल्ली-देहरादून से लेकर दिल्ली-मुंबई तक बड़े एक्सप्रेसवे की कनेक्टिविटी से इस इलाके की आवाजाही आसान होने जा रही है। एक्सप्रेसवे के इस नेटवर्क ने पूरे क्षेत्र को नई पहचान देने के साथ विकास की संभावनाओं के नए दरवाजे भी खोले हैं।
वर्तमान में यमुनापार के लोगों को सीधे और परोक्ष रूप से देश के कई बड़े एक्सप्रेसवे की कनेक्टिविटी मिल रही है। इनमें दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे, दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे, यमुना एक्सप्रेसवे, ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे और जल्द ही जुड़ने वाला दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे शामिल है। डीएनडी फ्लाईवे जैसे अहम लिंक इस पूरे नेटवर्क को आपस में जोड़ने का काम करते हैं। सबसे बड़ा बदलाव दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे से आया है। अक्षरधाम से शुरू होकर यमुनापार को सीधे उत्तराखंड से जोड़ता है। दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे ने पश्चिमी यूपी तक पहुंच तेज की है जबकि यमुना एक्सप्रेसवे ने आगरा और उससे आगे का सफर आसान कर दिया है। आने वाले समय में दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे भी निर्माणाधीन फेज-3 के बारापुला एलिवेटेड कॉरिडोर से नोएडा लिंक रोड से जुड़ जाएगा। इससे हरियाणा, राजस्थान, गुजरात और महाराष्ट्र की आवाजाही बेहतर होगी। ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे भारी ट्रैफिक को शहर से बाहर डायवर्ट कर इस पूरे नेटवर्क को संतुलित करता है। कनेक्टिविटी के लिहाज से अब यमुनापार राजधानी का दूसरा किनारा नहीं, बल्कि देश के कई हिस्सों को जोड़ने वाला अहम द्वार बन चुका है।
यमुनापार को संतुलित विकास से जोड़ना जरूरी...
यमुनापार लंबे समय से दिल्ली के सबसे घनी आबादी वाले इलाकों में रहा है। सीलमपुर, मौजपुर, लक्ष्मी नगर, शाहदरा, मयूर विहार समेत आसपास के क्षेत्रों में बड़ी आबादी रहती है। इसके अनुपात में यहां बुनियादी ढांचे का विस्तार वर्षों तक सीमित रहा। यहां के लाखों लोग रोजाना रोजगार के लिए मध्य और दक्षिणी दिल्ली के साथ-साथ एनसीआर के अन्य हिस्सों की ओर जाते हैं, जिससे आईटीओ, अक्षरधाम और सराय काले खां जैसे इलाके लगातार जाम के हॉटस्पॉट बने रहे। पर्याप्त सड़क कनेक्टिविटी का अभाव भी लंबे समय तक महसूस किया गया। दूसरी ओर, जब नोएडा, ग्रेटर नोएडा और गाजियाबाद तेजी से इंफ्रास्ट्रक्चर और निवेश के केंद्र बन रहे थे, तब यमुनापार को भी उसी स्तर की कनेक्टिविटी देना जरूरी हो गया था, ताकि यह क्षेत्र विकास की मुख्यधारा से पीछे न रह जाए। ऐसे में एक्सप्रेसवे नेटवर्क का विस्तार केवल सुविधा नहीं, बल्कि यमुनापार को संतुलित विकास से जोड़ने की अनिवार्य जरूरत बन गया।
मल्टी डायरेक्शनल कनेक्टिविटी जोन बना यमुनापार
एक्सप्रेसवे नेटवर्क के तेजी से विस्तार ने यमुनापार की भूमिका को पूरी तरह बदल दिया है। जो इलाका कभी शहर का डेड एंड माना जाता था, वह अब मल्टी-डायरेक्शनल कनेक्टिविटी जोन के रूप में उभर चुका है। यहां से देहरादून, मेरठ और आगरा जैसे प्रमुख शहर अब कुछ ही घंटों की दूरी पर आ गए हैं, जबकि दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे के जरिए पश्चिम भारत तक भी तेज और सीधी पहुंच संभव होने जा रही है। इस बदली हुई कनेक्टिविटी का असर अब जमीन पर भी दिखने लगा है।

