होर्मुज बंद, समुद्री व्यापार प्रभावित, अब जमीन से हो रही आपूर्ति
नई दिल्ली | मिडिल ईस्ट में जारी भीषण संघर्ष के बीच इंडो-पैसिफिक क्षेत्र से आई एक खबर ने वैश्विक रक्षा गलियारों में खलबली मचा दी है। अमेरिकी नौसेना का शक्तिशाली गाइडेड मिसाइल डिस्ट्रॉयर 'USS हिगिंस' एशियाई समुद्र में तैनात रहने के दौरान भीषण आग की चपेट में आ गया। रिपोर्टों के अनुसार, इस घटना में जहाज के इलेक्ट्रिकल सिस्टम और इंजन को भारी नुकसान पहुंचा है, जिससे इसकी परिचालन क्षमता पर सवाल खड़े हो गए हैं। हालांकि अमेरिकी रक्षा विभाग (पेंटागन) ने इसे एक 'इलेक्ट्रिकल फॉल्ट' बताया है, लेकिन घटना की टाइमिंग और परिस्थितियों ने साजिश की आशंकाओं को जन्म दे दिया है। सोशल मीडिया पर इस आग को चीन की गुप्त कार्रवाई या मिडिल ईस्ट की जंग के विस्तार से जोड़कर देखा जा रहा है। चौंकाने वाली बात यह है कि इसी महीने अमेरिका के दो अन्य विशाल विमानवाहक पोतों—USS ड्वाइट डी आइजनहावर और USS जेराल्ड आर फोर्ड—में भी रहस्यमयी तरीके से आग लगने की खबरें आई थीं, जिससे अमेरिकी नौसेना की सुरक्षा तैयारियों पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
पश्चिम एशिया में गहराता संकट: UAE का यात्रा बैन और ट्रंप की नाटो को सेना वापसी की धमकी
बदलते वैश्विक हालातों के बीच संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने अपने नागरिकों के लिए सख्त चेतावनी जारी करते हुए ईरान, लेबनान और इराक की यात्रा पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। विदेश मंत्रालय ने इन देशों में मौजूद अपने नागरिकों को तुरंत स्वदेश लौटने का निर्देश दिया है, जो क्षेत्र में किसी बड़े सैन्य टकराव की आहट का संकेत माना जा रहा है। दूसरी ओर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक नए विवाद को जन्म देते हुए यूरोप से अपने सैनिकों को वापस बुलाने के संकेत दिए हैं। ट्रंप ने स्पेन और इटली में तैनात अमेरिकी सेना की संख्या कम करने पर विचार करने की बात कही है, क्योंकि उनके अनुसार इन देशों ने ईरान के खिलाफ युद्ध में अमेरिका का साथ नहीं दिया। ट्रंप ने जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज की कार्यशैली पर भी तीखा हमला बोला है। ट्रंप का यह कड़ा रुख दर्शाता है कि मिडिल ईस्ट की जंग अब केवल एक क्षेत्रीय संघर्ष नहीं रह गई है, बल्कि इसने अमेरिका और उसके पारंपरिक सहयोगियों (नाटो) के बीच भी एक गहरी कूटनीतिक दरार पैदा कर दी है।

