वॉशिंगटन: दुनिया के तमाम देशों, खासकर भारत के लिए पश्चिम एशिया से एक बहुत बड़ी और राहत भरी खबर आई है। अमेरिका और ईरान के बीच हुए एक ऐतिहासिक शांति समझौते के बाद इस क्षेत्र में जारी युद्ध की आग शांत होने की उम्मीद बढ़ गई है। इसके साथ ही, वैश्विक ऊर्जा व्यापार की जीवनरेखा माने जाने वाले 'होर्मुज जलडमरूमध्य' (Strait of Hormuz) को दोबारा खोल दिया गया है, जिससे भारत के लिए तेल और गैस की आपूर्ति फिर से बहाल हो गई है।

खुल गया समुद्री मार्ग, भारत आ रहे 40 टैंकर

अमेरिकी नौसेना ने ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी को पूरी तरह समाप्त कर दिया है। इस फैसले के बाद, होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही फिर से शुरू हो गई है। भारत के लिए राहत की बात यह है कि एलपीजी, एलएनजी और कच्चे तेल से लदे 40 टैंकर भारत आने के लिए बिल्कुल तैयार हैं। इससे भारतीय घरों में रसोई गैस (एलपीजी) के संकट का खतरा टल गया है।

रसोई गैस की किल्लत होगी दूर

विशेषज्ञों के अनुसार, पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण भारत का एलपीजी आयात घटकर सामान्य दिनों के मुकाबले सिर्फ 51 प्रतिशत रह गया था। ऐसे में अब मार्ग खुलने के बाद सबसे पहले एलपीजी और एलएनजी की सप्लाई को चरणबद्ध तरीके से सुधारा जाएगा। हालांकि, इस संकट के दौरान भारत ने अन्य वैकल्पिक स्रोतों से कच्चा तेल खरीदना जारी रखा था, जिससे देश में कच्चे तेल की आपूर्ति पूरी तरह ठप नहीं हुई थी।

खेती के लिए भी बड़ी राहत, उर्वरकों से लदे 16 जहाज रवाना

पश्चिम एशिया के इस संकट के कारण भारत के लिए उर्वरक (फर्टिलाइजर) लेकर आ रहे 16 जहाज भी होर्मुज जलडमरूमध्य में फंस गए थे। मार्ग खुलने के बाद अब ये जहाज भी भारत के लिए रवाना होने को तैयार हैं। इन जहाजों में यूरिया, डीएपी, अमोनिया और सल्फर की बड़ी खेप है, जो देश में खरीफ फसल के सीजन के लिए बेहद जरूरी है। इससे भारतीय कृषि और किसानों को बड़ी राहत मिलेगी।

भारतीय अर्थव्यवस्था और रिफाइनरियों को लाभ

होर्मुज जलडमरूमध्य फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है और दुनिया के कुल तेल व्यापार का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। इस मार्ग के सामान्य होने से समुद्री मालभाड़ा और बीमा की लागत कम होगी, जिससे भारतीय रिफाइनरियों को सस्ता कच्चा तेल आसानी से मिल सकेगा। इससे देश की आर्थिक गतिविधियों को रफ्तार मिलेगी।

भविष्य के संकट से बचने के लिए विशेषज्ञों की सलाह

इस संकट के टलने के बीच, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने भारत को भविष्य के लिए सतर्क किया है। उन्होंने कहा है कि भारत को ऐसे झटकों से बचने के लिए अपने 'रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार' (Strategic Petroleum Reserve) को और बड़ा करना होगा। साथ ही उन्होंने सलाह दी कि भारत को ऊर्जा और दवा (फार्मा) जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों के लिए किसी एक देश या समुद्री मार्ग पर अपनी निर्भरता कम करनी चाहिए।