नई दिल्ली: निवेश की दुनिया में इंसानी सूझबूझ बनाम कंप्यूटर का बेजोड़ गणित

साल 1997 का वह दौर भला कौन भूल सकता है जब शतरंज के बेताज बादशाह गैरी कास्पारोव को आईबीएम के 'डीप ब्लू' सुपर कंप्यूटर ने शिकस्त दी थी। उस ऐतिहासिक पल ने पूरी दुनिया को यह अहसास कराया कि जहां मानव मस्तिष्क की सीमा समाप्त होती है, वहां से एल्गोरिदम और डेटा का एक नया युग प्रारंभ होता है। वर्तमान समय में ठीक इसी तरह का एक बड़ा बदलाव निवेश के क्षेत्र में भी देखने को मिल रहा है। अब आपके गाढ़े पसीने की कमाई को बढ़ाने का जिम्मा किसी फंड मैनेजर के व्यक्तिगत फैसलों या उसकी अंतरात्मा की आवाज पर निर्भर नहीं है, बल्कि इसकी बागडोर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और क्वांट फंड के सटीक गणितीय समीकरणों के हाथों में जा चुकी है।

आमतौर पर शेयर बाजार में पैसा डूबने की सबसे बड़ी वजह डर और लालच जैसी मानवीय भावनाएं होती हैं। बाजार के आसमान छूने पर लोग लालच में आकर महंगी खरीदारी कर लेते हैं और गिरावट आने पर डर के मारे सस्ते में शेयर बेचकर बाहर निकल जाते हैं। इसी मानवीय कमजोरी को दूर करने के लिए क्वांट फंड की शुरुआत हुई है, जो पूरे खेल को ही बदल देते हैं। इस आधुनिक निवेश प्रणाली में किसी व्यक्ति की व्यक्तिगत पसंद-नापसंद का कोई महत्व नहीं होता, बल्कि पूरी तरह कंप्यूटर और एआई ही यह तय करते हैं कि किस समय बाजार में दांव लगाना है और कब कदम पीछे खींचने हैं।

मशीन और गणित के तालमेल से चलने वाली निवेश की नई व्यवस्था

क्वांट फंड की पूरी कार्यप्रणाली जटिल गणितीय मॉडलों और आंकड़ों के गहरे विश्लेषण पर टिकी होती है। इसमें शेयर का चुनाव करने के लिए कुछ कड़े नियम पहले से निर्धारित कर दिए जाते हैं, जिनमें कंपनी की वैल्यू, उसकी परफॉर्मेंस की क्वालिटी, बाजार की रफ्तार और उतार-चढ़ाव जैसे महत्वपूर्ण मानकों को शामिल किया जाता है। इस पूरी प्रक्रिया की सबसे बेहतरीन बात यह है कि इसमें इंसानी जज्बात कहीं भी आड़े नहीं आते। फंड मैनेजर का काम केवल सटीक आंकड़े जुटाना और कंप्यूटर के लिए एक मजबूत मॉडल तैयार करना होता है, जिसके बाद का पूरा काम मशीनें खुद-ब-खुद संभाल लेती हैं। पुराने और नए आंकड़ों के मेल से तैयार होने वाले इन मॉडलों को एआई की मदद से समय-समय पर अपडेट भी किया जाता रहता है।

हालांकि भारतीय शेयर बाजार के परिदृश्य को देखा जाए, तो अभी भी यहां क्वांट फंड का दायरा काफी सीमित है और आम रिटेल निवेशकों के बीच इसे लेकर बहुत ज्यादा उत्साह नहीं देखा गया है। वर्तमान में एसबीआई, निप्पॉन और आईसीआईसीआई जैसी गिने-चुने फंड हाउस ही इस रणनीति पर आधारित कुछ म्यूचुअल फंड योजनाएं चला रहे हैं, जो फ्लेक्सी कैप, मल्टी कैप या विशिष्ट थीम्स पर काम करती हैं। शुरुआत में तो इन फंडों ने बेहतरीन रिटर्न देकर सबको चौंकाया था, लेकिन हाल के दिनों में बदलते बाजार के मिजाज के कारण इन्हें प्रदर्शन के मोर्चे पर थोड़ा संघर्ष भी करना पड़ा है।

बाजार के अप्रत्याशित संकट और इस रणनीति की अपनी सीमाएं

यह समझना बेहद जरूरी है कि क्वांट फंड का पूरा ताना-बाना पुराने इतिहास और बीते आंकड़ों पर बुना जाता है, लेकिन शेयर बाजार का यह नियम है कि वहां हमेशा इतिहास दोहराया जाए, ऐसा मुमकिन नहीं है। जब भी दुनिया में युद्ध, महामारी या किसी बड़ी भू-राजनीतिक उथल-पुथल जैसी अचानक घटनाएं होती हैं, तो कंप्यूटर के मॉडल इन अप्रत्याशित हालातों को भांपने में नाकाम साबित होते हैं। ऐसे में एल्गोरिदम को नए सिरे से स्थिति समझने और खुद को ढालने में थोड़ा समय लग जाता है, जिसका सीधा असर निवेशकों के मुनाफे पर पड़ता है और उन्हें नुकसान उठाना पड़ सकता है। इसके अलावा, मशीनी सिस्टम द्वारा लगातार शेयरों की खरीद-बिक्री करने से टैक्स और ब्रोकरेज का खर्च भी काफी बढ़ जाता है, जो अंततः आपके शुद्ध रिटर्न को कम करता है।

प्रमुख क्वांट फंड्स का पिछले तीन वर्षों का सालाना रिटर्न:

फंड स्कीम का नाम सालाना रिटर्न (प्रतिशत में)
360 One Quant Fund 21.10%
Nippon India Quant Fund 17.14%
ICICI Pru Quant Fund 14.34%
Tata Quant Fund 14.04%
Axis Quant Fund 11.59%

ऊपर दिए गए आंकड़ों से स्पष्ट है कि 360 वन क्वांट फंड ने 21.10 प्रतिशत के शानदार आंकड़े के साथ बाजी मारी है, जबकि निप्पॉन और आईसीआईसीआई के फंड भी इसके बाद बेहतर प्रदर्शन करने में सफल रहे हैं। यह साबित करता है कि मशीनी दिमाग भी बाजार से एक तगड़ा रिटर्न निकालने की क्षमता रखता है।

देश के बड़े क्वांट फंड्स का एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM):

टॉप फंड का नाम एयूएम (करोड़ रुपये में)
SBI Quant Fund 3051
ABSL Quant Fund 2026
UTI Quant Fund 1611
Axis Quant Fund 864
Kotak Quant Fund 505

एयूएम के आंकड़ों पर नजर डालें तो एसबीआई क्वांट फंड पर निवेशकों ने सबसे ज्यादा भरोसा जताया है, जहां 3051 करोड़ रुपये की बड़ी रकम लगी हुई है। इसके बाद आदित्य बिड़ला और यूटीआई का स्थान आता है, जिससे यह साफ होता है कि निवेशक अब बड़े और स्थापित फंड हाउस के जरिए इस नई तकनीक पर अपना दांव लगाने के लिए आगे आ रहे हैं।

आम निवेशकों के लिए समझदारी भरा फैसला और सही रणनीति

यदि आपके मन में भी यह सवाल उठ रहा है कि क्या आपको इस माध्यम में पैसा लगाना चाहिए, तो इसका जवाब आपके निवेश के नजरिए में छिपा है। जो अनुभवी निवेशक बाजार में पहले से मौजूद हैं और अपने पोर्टफोलियो में कुछ नयापन और विविधता लाना चाहते हैं, उनके लिए यह एक बेहतरीन जरिया हो सकता है। मगर यह ध्यान रखना जरूरी है कि यह हर किसी के लिए अनुकूल नहीं है; एक साधारण निवेशक के लिए कंप्यूटर की इस पेचीदा गणितीय प्रणाली को समझना काफी मुश्किल काम है। जो लोग सुरक्षित निवेश चाहते हैं या जिनका नजरिया कम समय का है, उन्हें इससे दूरी बनाकर रखनी चाहिए। इसमें केवल वही लोग कदम बढ़ाएं जो जोखिम लेने का हौसला रखते हैं और कम से कम 5 से 7 साल तक अपने पैसे को रोकने के लिए तैयार हैं।

विशेषज्ञों की मानें तो क्वांट फंड्स को कभी भी अपने मुख्य निवेश का आधार नहीं बनाना चाहिए। इसे हमेशा एक सपोर्टिंग एसेट या पोर्टफोलियो में केवल डायवर्सिफिकेशन लाने के एक माध्यम के रूप में इस्तेमाल करना ही समझदारी है। बेहतर यही होगा कि आप अपने कुल इक्विटी निवेश का केवल 10 से 15 प्रतिशत हिस्सा ही इन फंडों को अलॉट करें। भारत में अभी यह तकनीक अपने शुरुआती चरण में है और भविष्य में एआई के विस्तार के साथ इसकी लोकप्रियता और बढ़ने की उम्मीद है, लेकिन निवेश की शुरुआत करने से पहले खुद की जोखिम क्षमता को जरूर तौल लें।