निफ्टी की चाल सुस्त, कंपनियों के नतीजे मजबूत; क्या अब शेयर चुनने का समय?
जब समुद्र में अनुकूल हवाएं चल रही हों, तो एक अनाड़ी नाविक भी आसानी से अपनी नाव पार लगा लेता है। पिछले दो-तीन वर्षों में भारतीय शेयर बाजार का हाल भी कुछ ऐसा ही रहा। किसी भी इंडेक्स फंड या ईटीएफ में निवेश करके निवेशक बिना खास मशक्कत के 15 से 20 प्रतिशत तक का रिटर्न हासिल कर लेते थे। ऐसा महसूस होने लगा था कि शेयर बाजार से कमाई करना महज 'इंडेक्स बाय' का विकल्प चुनने जितना आसान है, लेकिन अब बाजार का मिजाज बदल चुका है।
निफ्टी 23,900 से 24,750 के सीमित दायरे में थमा हुआ नजर आ रहा है। भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव ने अनिश्चितता तो बढ़ाई, लेकिन बाजार को कोई स्पष्ट दिशा नहीं मिल सकी। चालू वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही के कॉरपोरेट नतीजे भी इसी ओर इशारा कर रहे हैं। यदि घाटे का सामना कर रही सरकारी तेल कंपनियों को अलग रख दें, तो निफ्टी-500 की शेष कंपनियों के शुद्ध लाभ में 23 प्रतिशत का शानदार उछाल दर्ज किया गया है, जो दो वर्षों का उच्चतम स्तर है। इसका साफ संदेश यह है कि मुख्य इंडेक्स की सुस्ती के बावजूद अलग-अलग शेयरों और सेक्टर्स में कमाई के बेहतरीन मौके बन रहे हैं। लिहाजा, अब सिर्फ 'पैसिव ईटीएफ' के भरोसे बैठने के बजाय समझदारी से एक्टिव स्टॉक-पिकिंग और सही सेक्टर चयन करने का समय आ गया है।
अब इंडेक्स नहीं, शेयर चुनने का दौर
बीते दो वर्षों में नए निवेशकों को यह आदत पड़ गई थी कि निफ्टी 50 या निफ्टी नेक्स्ट 50 का ईटीएफ खरीद लो, रिटर्न अपने-आप बन जाएगा। लेकिन सीमित दायरे वाले बाजार में पैसिव स्ट्रैटेजी का रिटर्न फ्लैट हो जाता है।
इस समय एक्टिव स्ट्रैटेजी की जरूरत है, क्योंकि सेक्टरों के बीच का अंतर ऐतिहासिक स्तर पर है। बैंकिंग, मेटल्स और टेलीकॉम ने दोहरे अंकों में मुनाफा दर्ज किया है, वहीं तेल मार्केटिंग कंपनियों ने अकेले ही हेडलाइन इंडेक्स के मुनाफे को निचोड़ दिया। जब इंडेक्स के भीतर कुछ दिग्गज शेयर नीचे खींच रहे हों और बाकी शेयर रॉकेट बन रहे हों, तो केवल एक्टिव स्टॉक-पिकिंग रणनीति ही आपके पोर्टफोलियो को इंडेक्स से बेहतर रिटर्न दिला सकती है।
पहली तिमाही में लीडर कौन?
-
बीएफएसआई: क्रेडिट ग्रोथ 17% के मजबूत स्तर पर। सरकारी बैंकों और एनबीएफसी ने एसेट क्वालिटी में सुधार के दम पर लीड किया।
-
मेटल्स और माइनिंग: लगातार चौथी तिमाही में शानदार प्रदर्शन। वैश्विक कीमतों में स्थिरता और मजबूत घरेलू मांग से मुनाफे में भारी उछाल।
-
टेलीकॉम: टैरिफ बढ़ोतरी और डाटा खपत से एवरेज रेवेन्यू पर यूजर सुधरा, जिससे ऑपरेटिंग मार्जिन में ठोस उछाल।
-
ऑटो व कंज्यूमर डिस्क्रीशनरी: पैसेंजर व्हीकल्स, टू-व्हीलर्स और ट्रैक्टर्स की मजबूत मांग के दम पर घरेलू खपत का पहिया तेजी से घूमा।
-
केमिकल्स व इंडस्ट्रियल्स: वायर्स, केबल्स और कंस्ट्रक्शन मैटेरियल की भारी सरकारी व निजी मांग से टॉप-लाइन और बॉटम-लाइन दोनों में जोरदार तेजी।
-
दबाव झेलने वाले सेक्टर्स: इनमें पश्चिम एशिया संकट के कारण ऑयल मार्केटिंग कंपनियां सबसे ऊपर हैं। इसके अलावा सीमेंट, एविएशन और फार्मा सेक्टर भी भारी दबाव में हैं।

